प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार, कॉन्सेप्ट फोटो
Bihar Politics: पटना की सियासी फिजा में एक नया मोड़ उस वक्त आया जब बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री और दिग्गज नेता वृषिण पटेल ने जन सुराज पार्टी का दामन थाम लिया. एक समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी रहे वृषिण पटेल अब जन सुराज के साथ नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर चुके हैं. बीते दिन रविवार को जन सुराज पार्टी में आधिकारिक रूप से शामिल होने के बाद उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र वैशाली का रुख किया और वहां के लोगों से सीधा संवाद शुरू किया.
राजनीति के जमीनी खिलाड़ी वृषिण पटेल
वृषिण पटेल का राजनीतिक सफर बेहद लंबा और प्रभावशाली रहा है. उनके निजी सचिव राजेश्वर पटेल के मुताबिक, वह पांच बार बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और वैशाली विधानसभा क्षेत्र से सात बार विधायक चुने जा चुके हैं. यही नहीं, उन्होंने सिवान लोकसभा सीट से सांसद के तौर पर भी जनता का प्रतिनिधित्व किया है.
पूर्व शिक्षा मंत्री ने जन सुराज पार्टी में शामिल होते ही सक्रियता दिखानी शुरू कर दी. रविवार को उन्होंने वैशाली के कई गांवों में जाकर लोगों से मुलाकात की, जनसभाएं कीं और पार्टी की नीतियों से जनता को अवगत कराया. वृषिण पटेल का कहना है कि जन सुराज एक वैकल्पिक और जनहितकारी सोच के साथ आगे बढ़ रही पार्टी है, और यही उन्हें इस दल की ओर खींच लाया.
आंबेडकर जयंती पर विचारों का मंच
वहीं, डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती के मौके पर पटना स्थित जन सुराज पार्टी मुख्यालय में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था – “वर्तमान संदर्भ में आंबेडकर के विचारों की चुनौतियां”, जो आज के दौर में बेहद प्रासंगिक है.
कार्यक्रम की शुरुआत बाबासाहेब की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण से हुई. इसके बाद सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति राजेंद्र प्रसाद और पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शिवजतन ठाकुर ने आंबेडकर के विचारों और उनके आज के समाज में महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला.
जन सुराज पार्टी के वरिष्ठ नेता आरके मिश्रा और एनपी मंडल ने दोनों मुख्य अतिथियों का स्वागत किया और डॉ आंबेडकर द्वारा लिखित पुस्तकें भेंट कीं. कार्यक्रम की अध्यक्षता पार्टी अध्यक्ष मनोज भारती ने की, जबकि मंच संचालन और धन्यवाद ज्ञापन अनिल आर्य ने किया.
राजनीतिक संदेश साफ है
वृषिण पटेल का जन सुराज पार्टी में शामिल होना और आंबेडकर जयंती पर आयोजित संगोष्ठी – ये दोनों घटनाएं इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि जन सुराज पार्टी बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाने को लेकर गंभीर है. एक ओर जहां अनुभवी नेताओं को साथ लाकर पार्टी अपनी नींव मजबूत कर रही है, वहीं सामाजिक मुद्दों पर विमर्श के माध्यम से आम लोगों से जुड़ाव भी बना रही है.
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बिहार की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय में क्या रंग लाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा. लेकिन इतना तय है कि जन सुराज पार्टी अब सिर्फ एक नई पार्टी नहीं, बल्कि नए विकल्प के रूप में तेजी से उभर रही है.