शोध में कई स्तर पर डेटा रिफाइन करना ही डेटा माइनिंग है
Data Mining in Research: महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन विभाग में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित दस दिवसीय शोध प्रविधि कार्यशाला के नौवें दिन शोध में डेटा माइनिंग की उपयोगिता पर केंद्रित सत्र का आयोजन किया गया.
पहले और दूसरे तकनीकी सत्र में हिन्दी विभाग, भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के डॉ उज्जवल आलोक ने सामाजिक शोध में डेटा माइनिंग की उपयोगिता तथा डिजिटल उपकरणों का डेटा माइनिंग में अनुप्रयोग विषय पर अपना व्याख्यान दिया.
उन्होंने कहा कि संग्रहित किए गए डेटा को विभिन्न स्तरों पर प्रोसेस करके उसमें से शोध के लिए आवश्यक जानकारी निकालना ही डेटा माइनिंग है. इसके अतिरिक्त उन्होंने शोधार्थियों को छः डिग्री पृथक्करण सिद्धांत के बारे में भी बताया. डॉ. आलोक ने बताया कि आज डेटा माइनिंग के लिए अनेक साफ्टवेयर विकसित है जिसकी सहायता से आवश्यकता के अनुरूप प्रामाणिक डेटा संग्रह किया जा सकता है.
तीसरे तकनीकी सत्र में अधिष्ठाता, सामाजिक विज्ञान संकाय, महात्मा गाँधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय प्रो. सुनील महावर ने शोध कार्य के लेखन में प्रयोग होने वाले उपकरणों को विस्तार से समझाते हुए सही तरीके से साइटेशन और एंड नोट शामिल करने का तरीका बताय. यह सत्र शोध कार्य को अंतिम रूप देने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था.
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इससे पूर्व विभागाध्यक्ष और कार्यशाला के निदेशक डॉ अंजनी कुमार झा ने सभी वक्ताओं तथा अतिथियों का अभिवादन व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया. सहायक आचार्य डॉ सुनील दीपक घोड़के ने सभी वक्ताओं एवं अतिथियों का परिचय कराते हुए कार्यशाला का संचालन किया. कार्यशाला में विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ परमात्मा कुमार मिश्र, डॉ साकेत रमण, डॉ उमा यादव, डॉ मयंक भारद्वाज एवं डॉ आयुष आनंद सहित अन्य शोधार्थी तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे.