MGCU: महात्मा गाँधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, बिहार मानविकी एवं भाषा संकाय के तत्त्वावधान में भारतीय ज्ञान परम्परा एवं आर्य भाषाएं विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया.
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मानविकी एवं भाषा संकाय के अधिष्ठाता प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने किया. मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रो अभिराज राजेंद्र मिश्र (भूतपूर्व कुलपति संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी) के साथ अन्य वक्ताओं में प्रो उपेन्द्र कुमार त्रिपाठी (काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी), प्रो अनिल सौमित्र ( भारतीय जनसंचार विभाग, जम्मू), प्रो शांतिकृष्ण अधिकारी (प्राध्यापक, तथ्यांग शास्त्र, नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय, काठमांडू) , प्रो श्रवन कुमार शर्मा (भूतपूर्व प्रोफेसर, अंग्रेजी विभाग, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार), प्रो केशव (न्याय विभाग, नेपाल) उपस्थित रहे.

प्रारम्भ में प्रो केशव ने संस्कृत के श्लोक से अभिवादन करते हुए भारतीय ज्ञान परम्परा के विषय में विस्तृत विवेचन किया.
इसी क्रम में भारतीय जनसंचार विभाग जम्मू से आये हुये विद्वान् प्रो. अनिल सौमित्र ने वर्तमान भाषा की दिशा एवं दशा को विवेचित किया. तो वहीं नेपाल से समागत विद्वान् प्रो. शांतिकृष्ण अधिकारी ने अपनी मातृभाषा नेपाली में अभिवादन करते हुए कहा कि सभी धर्म का मूल वेद है और हम जो भी हैं, वेद से ही हैं. तत्पश्चात् प्रो. श्रवन कुमार शर्मा ने गुरुचरण दास के विचारों से श्रोताओं को अवगत कराते हुये वाणी के चार भेदों को बताया.
पद्मश्री सम्मान से विभूषित अभिराज राजेंद्र मिश्र ने भारतीय ज्ञान परम्परा में परंपरा शब्द पर प्रकाश डालते हुये कहा कि परम्परा से तात्पर्य पूर्व से निरन्तर जुड़ा होना होता है. उन्होंने आगे बतलाया कि जीवन के तीन भेद होते हैं जिनमें भारतीय ज्ञान परम्परा सहित ईश्वर के साथ जीवन जीना, आध्यात्मिक जीवन जीना और पंचमहाभूतों के साथ जीवन जीना. प्रो. मिश्र ने अन्त में कहा कि ईश्वर के साथ जीवन जीना ही भारतीय परम्परा रही है, जो आध्यात्मिक और आधिभौतिक जगत् से ब्रह्म को जोड़ने वाली होती है.
अन्त में कार्यक्रम संयोजक प्रो प्रसून दत्त सिंह ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारतीय भाषाएं विलुप्त होती चली जा रही रही हैं और इन्हें संरक्षित करने की आवश्यकता है. भारतीय ज्ञान परम्परा ने विश्व का सदैव नेतृत्व किया है. कार्यक्रम को अंतिम स्वरूप संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो श्यामकुमार झा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के द्वारा प्रदान किया गया. इस कार्यक्रम का मंच संचालन अंग्रेजी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ उमेश पात्रा ने और वैदिक मंगलाचरण शोधछात्र गोपाल कृष्ण मिश्र किया.
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उद्घाटन सत्र में मानविकी एवं भाषा संकाय के सभी प्राध्यापक उपस्थित रहे. हिंदी विभाग के डॉ. गोविंद प्रसाद वर्मा , डॉ. श्यामनंदन , डॉ. आशा मीणा, डॉ. बबलू पाल, डॉ. विश्वजीत वर्मन, डॉ विमलेश कुमार सिंह , डॉ. दीपक , डॉ. चंदोवा बालेंदु नर्सिंग, डॉ. कल्याणी हाजिरी के साथ – साथ सैकड़ों शोधार्थी और छात्र उपस्थित रहे.