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UGC anti-ragging defaulters list: देश की बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी और संस्थानों में पढ़ने का सपना हर छात्र का होता है. लेकिन जब उन्हीं संस्थानों पर छात्रों की सुरक्षा से जुड़ी लापरवाही के आरोप लगें, तो चिंता होना स्वाभाविक है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में 89 उच्च शिक्षण संस्थानों को “एंटी-रैगिंग नियमों की अनदेखी” करने पर नोटिस जारी किया है.
इन संस्थानों में आईआईटी, आईआईएम, आईआईआईटी, एनआईडी और एम्स जैसे देश के प्रतिष्ठित नाम भी शामिल हैं। इनमें आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी पालक्कड़, आईआईएम बैंगलोर, आईआईएम रोहतक, आईआईएम तिरुचिरापल्ली, और एम्स रायबरेली जैसे नाम प्रमुख हैं.
UGC के अनुसार, ये संस्थान छात्र-छात्राओं से अनिवार्य एंटी-रैगिंग हलफनामा नहीं ले पाए और ना ही समय पर नियमों के पालन की रिपोर्ट जमा कर पाए. जबकि यूजीसी और उसकी एंटी-रैगिंग मॉनिटरिंग एजेंसी कई बार ईमेल, कॉल और चेतावनी जारी कर चुकी थी.
क्या है पूरा मामला?
UGC की 9 जून की नोटिस के अनुसार, संस्थानों को हर वर्ष छात्रों से ऑनलाइन एंटी-रैगिंग शपथपत्र लेना होता है और साथ ही, कॉलेज प्रशासन को यह रिपोर्ट देनी होती है कि उनके कैंपस में रैगिंग रोकने के क्या उपाय किए गए हैं.
लेकिन इन 89 संस्थानों ने ये दोनों ही काम तय समय में नहीं किए. यही नहीं, इनकी तरफ से किसी भी ठोस जवाब या सुधार की कोशिश भी नहीं की गई.
किन्हें चेतावनी मिली?
इन 89 संस्थानों में से 17 को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान माना जाता है। इनमें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टिट्यूट कोलकाता, राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी (बसर), इग्नू, बेंगलुरु सेंट्रल यूनिवर्सिटी, और वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज जैसे नाम भी शामिल हैं.
अब आगे क्या होगा?
यूजीसी ने सभी संस्थानों को 30 दिनों का समय दिया है. इस दौरान उन्हें सभी छात्रों से ऑनलाइन एंटी-रैगिंग हलफनामा लेना होगा और अपने कैंपस में रैगिंग रोकने के उपायों की डिटेल रिपोर्ट भी जमा करनी होगी.
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अगर संस्थान अब भी लापरवाही करते हैं तो यूजीसी ने साफ कहा है कि “फंडिंग रोकना, सार्वजनिक रूप से नाम उजागर करना और संस्थान की मान्यता रद्द करना” जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं.
UGC की अपील
यूजीसी ने सभी संस्थानों से अपील की है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें, क्योंकि यह छात्रों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है. रैगिंग के मामलों में हाल के वर्षों में बढ़ती शिकायतों को देखते हुए अब कोई ढील नहीं बरती जाएगी.