शुभांशु शुक्ला, फोटो - सोशल मीडिया
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने कहा है कि भारतीय अंतरिक्ष यात्री Shubhanshu Shukla का 15 दिन का अंतरिक्ष मिशन गगनयान कार्यक्रम के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा. शुभांशु 41 साल बाद अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय बने हैं. उन्होंने यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) और स्पेस शटल के जरिये पूरी की, जहां उन्होंने कई वैज्ञानिक प्रयोग किए.
इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के निदेशक निलेश एम देसाई ने बताया कि यह मिशन न केवल शुभांशु शुक्ला के लिए, बल्कि इसरो के लिए भी एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा है.
उन्होंने स्पेस शटल और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कई प्रयोग किए, जिससे हमें माइक्रोग्रैविटी यानी गुरुत्वाकर्षण रहित वातावरण में काम करने का अनुभव मिला. ये अनुभव गगनयान मिशन की सफलता में मदद करेंगे.
गगनयान मिशन के तहत सबसे पहले इस साल एक मानवरहित मिशन भेजा जाएगा, उसके बाद दो और मानवरहित उड़ानें होंगी. इसके बाद एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को गगनयान यान में भेजा जाएगा, जो दो से सात दिन तक अंतरिक्ष में रहकर वापस लौटेगा.
इसरो ने खर्च किए 600 करोड़ रुपये
इसरो ने इस मिशन के लिए करीब 600 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसमें दो भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग और अन्य तैयारी शामिल हैं. शुभांशु शुक्ला को अमेरिका में करीब पांच से छह महीने की ट्रेनिंग दी गई थी. उनके साथ एक अन्य भारतीय यात्री प्रशांत नायर को भी ट्रेनिंग दी गई थी, जो बैकअप के रूप में तैयार थे. हालांकि, अंतिम मिशन में सिर्फ शुक्ला को भेजा गया.
25 जून को शुभांशु हुए थे रवाना
शुभांशु 25 जून को स्पेसएक्स के फाल्कन लॉन्च व्हीकल से ड्रैगनफ्लाई स्पेसक्राफ्ट के जरिए अंतरिक्ष के लिए रवाना हुए थे और 26 जून को ISS से जुड़ गए थे। वहां उन्होंने 15 दिनों तक वैज्ञानिक परीक्षण किए. अब उनका स्पेसक्राफ्ट आज सुबह 4:35 बजे अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन से अलग हो चुका है और वापसी के लिए रवाना हो चुका है. उम्मीद है कि यह यान 16 जुलाई को दोपहर 3 बजे भारतीय समयानुसार कैलिफोर्निया तट पर सुरक्षित लैंड करेगा.
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मिशन की समाप्ति के बाद सभी अंतरिक्ष यात्रियों की मेडिकल जांच और रिकवरी प्रक्रिया की जाएगी. निलेश देसाई ने भारत और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष सहयोग की भी सराहना की. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान ISRO और NASA के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अमेरिकी मिशन के तहत ISS भेजा गया.