CUPB, Photo Source: Newsmorrow
तेजी से बदलते डिजिटल परिदृश्य में सार्वजनिक पुस्तकालयों की भूमिका क्या होगी? इसी अहम सवाल का जवाब खोजने के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ पंजाब (CUPB), बठिंडा में शुक्रवार को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ.
‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युग में सार्वजनिक पुस्तकालयों का बदलता प्रतिमान’ विषय पर केंद्रित इस संगोष्ठी को राजा राममोहन रॉय लाइब्रेरी फाउंडेशन, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार का सहयोग प्राप्त हुआ.
देशभर से आए प्रख्यात विद्वान, पुस्तकालय विज्ञान के विशेषज्ञ, प्रौद्योगिकीविद और छात्र इस मंथन का हिस्सा बने. संगोष्ठी का उद्देश्य एआई तकनीक के युग में पुस्तकालय सेवाओं के स्वरूप, चुनौतियों और अवसरों पर गहन चर्चा करना था.
एआई को अपनाने की आवश्यकता पर जोर
कुलपति प्रो राघवेंद्र पी तिवारी के संरक्षण में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ सूचना एवं संचार अध्ययन संकाय के डीन डॉ भव नाथ पांडे के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कहा, “पुस्तकालय सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए एआई का समावेश समय की मांग है.”
पुस्तकालयों के लिए नए कौशल और तकनीक आवश्यक
मुख्य अतिथि जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो रोशन लाल रैना ने अपने विचार रखते हुए कहा कि पुस्तकालयों में एआई का समावेश न केवल सेवाओं को स्मार्ट बनाएगा, बल्कि लाइब्रेरियनों के कौशल को भी नई दिशा देगा. उन्होंने डेटा-संचालित उपकरणों के माध्यम से यूजर्स जुड़ाव बढ़ाने पर जोर दिया.
नैतिकता और वैयक्तिकरण पर भी हुई चर्चा
बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की प्रो शिल्पी वर्मा ने एआई-संचालित पुस्तकालय प्रणालियों में नैतिक पहलुओं और उपयोगकर्ता के व्यक्तिगत अनुभव पर प्रकाश डाला. वहीं पंजाब विश्वविद्यालय के प्रो रूपक चक्रवर्ती ने एआई आधारित मेटाडेटा और सूचना पुनर्प्राप्ति पर अपनी केस स्टडी प्रस्तुत की.
तकनीकी सत्रों में हुई गहन पड़ताल
संगोष्ठी में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से तकनीकी सत्र आयोजित किए गए. इनमें कैटलॉगिंग, वर्चुअल रेफरेंस सेवाओं और उपयोगकर्ता विश्लेषण में एआई की भूमिका जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की. इन सत्रों का संचालन डॉ भूपिंदर सिंह, रुपिंदर सिंह, डॉ एके सिवाच और डॉ हरीश चंदर ने किया.
ग्रामीण पुस्तकालयों के लिए भी जरूरी एआई
समापन सत्र में टीएस सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी की लाइब्रेरियन डॉ नीजा सिंह ने विशेष रूप से ग्रामीण पुस्तकालयों में एआई को समावेशी रूप से अपनाने की वकालत की. उन्होंने कहा कि एआई के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों के पाठकों को भी उच्चस्तरीय डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं.
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प्रति-कुलपति प्रो किरण हजारिका ने संगोष्ठी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, “पुस्तकालयों का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा जब शिक्षाविद, नीति निर्माता और तकनीकी विशेषज्ञ मिलकर काम करेंगे।” उन्होंने इसे ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अहम योगदान बताया.
अंत में आयोजन सचिव डॉ ऋषभ श्रीवास्तव ने वक्ताओं, प्रतिभागियों, प्रायोजकों और विभाग के शोधार्थियों व छात्रों का आभार जताया. इस अवसर पर डॉ सुखदेव सिंह, सोमेश राय, डॉ फ्लोरेंस गुइटे सहित कई अन्य संकाय सदस्य भी मौजूद रहे.