MGCU Resarch Papers: समाजशास्त्र विभाग, महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित द्वि-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन समारोह हुआ. उसके पूर्व आयोजित तकनीकी सत्रों में विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों, शोधार्थियों और शिक्षकों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए.
समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कुलपति प्रो संजय श्रीवास्तव उपस्थित थे. प्रो सुनील महावर ने स्वागत संबोधन दिया, जबकि डॉ सुजीत कुमार चौधरी ने संगोष्ठी की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की.
कुलपति प्रो संजय श्रीवास्तव ने अध्यक्षीय संबोधन में शोध और अकादमिक विकास पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि समाज को समझने के लिए जरूरी है कि समाजशास्त्र के विभिन्न पहलुओं से अवगत हो.
समापन भाषण प्रो सी राघव रेड्डी (हैदराबाद विश्वविद्यालय) ने दिया, जिसमें उन्होंने शोध कार्यों के समाज पर प्रभाव को रेखांकित किया। इस अवसर पर संगोष्ठी के एब्स्ट्रैक्ट बुकलेट का विमोचन भी किया गया.
तकनीकी सत्रों में सामाजिक स्वास्थ्य, योग, नगरीकरण, जनजातीय जीवन, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल साक्षरता और समाजशास्त्रीय सिद्धांतों पर गहन चर्चा हुई। संगोष्ठी के प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ चक्रवर्ती महाजन, सहायक प्रोफेसर, दिल्ली विश्वविद्यालय, ने की. उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान कार्यविधि मुद्दे: सीमावर्ती जम्मू और कश्मीर में फील्डवर्क और अनुसंधान कार्यान्वयन रणनीति” पर व्याख्यान दिया.
उन्होंने अपने अध्ययन में सीमावर्ती क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों और ‘सैंडविच गांवों’ में अनुसंधान की चुनौतियों पर प्रकाश डाला.
सत्र के सह-अध्यक्ष डॉ प्रिय रंजन, सहायक प्रोफेसर, साउथ बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, ने “योग और उसका समाजशास्त्रीय पुनर्गठन” विषय पर व्याख्यान दिया.
उन्होंने योग के आठ अंगों—यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि—पर चर्चा की और योग के समाजशास्त्रीय व आयुर्वेदिक पहलुओं को विस्तार से समझाया.
तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों की भागीदारी
दूसरे सत्र में डॉ. के.एम. जियाउद्दीन, एसोसिएट प्रोफेसर, मानू ने “समाजशास्त्रीय सिद्धांत, सार्वजनिक स्वास्थ्य और नगरीकरण” पर व्याख्यान दिया.
इस सत्र में संजय कुमार वर्मा , साउथ बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय ने “वैश्वीकरण और परिवार: एक समाजशास्त्रीय अध्ययन”, अशोक कुमार चौधरी , एमजीसीयू ने “थारू जनजाति और प्रवास की भूमिका” और शांति, औऱ “खरवार जनजाति में व्यवहारिक कौशल और डिजिटल साक्षरता” पर शोध पत्र प्रस्तुत किए.
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तीसरे सत्र में प्रो. ग्रिट कोएट्ज़च (अर्जेंटीना) ने “डिकॉलोनिज़िंग एपिस्टोमोलॉजी” पर व्याख्यान दिया। सह-अध्यक्ष डॉ विवेकानंद नायक ने “स्वास्थ्य और विकास: ओडिशा की कोंध जनजाति की पारंपरिक और आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल पद्धतियों का विरोधाभास” विषय पर चर्चा की।
इस दौरान विभिन्न शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए, जिनमें डॉ देवर्षि तालुकदार (वीसी डब्ल्यु, कोलकाता), डॉ लूसी मिश्रा (KIIT केआईआईटी, विश्वविद्यालय), डॉ सुजॉय कुंडू ( ओडिशा), और नेहाल रशद खान (लखनऊ विश्वविद्यालय) शामिल थे.