सप्त दिवसीय व्याख्यानमाला का हुआ भव्य समापन
MGCU: मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग ने प्रो सतीश चन्द्र झा स्मृति व्याख्यानमाला का आयोजन किया. सात दिनों तक चली इस व्याख्यानमाला का समापन सत्र हाल ही में संपन्न हुआ.
इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में हरियाणा के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर ललित कुमार गौड़ ने हिस्सा लिया. उन्होंने संस्कृत साहित्य के इतिहास को प्राचीन काल से लेकर 21वीं सदी तक आसान और रोचक तरीके से समझाया. प्रो गौड़ ने वेदों, पुराणों, रामायण, महाभारत और आज के साहित्य में छिपे गहरे दार्शनिक विचारों को सबके सामने रखा.
उन्होंने अपनी बात को सिर्फ संस्कृत में ही नहीं, बल्कि हिंदी, अंग्रेजी और हरियाणवी भाषा में भी पेश किया। गद्य और कविता के जरिए उन्होंने इतिहास, भूगोल, राजनीति, अर्थशास्त्र और समाजशास्त्र जैसे विषयों को संस्कृत साहित्य से जोड़कर बताया.
उनकी बातें इतनी सरल थीं कि हर कोई समझ सके. कार्यक्रम के संयोजक और संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डॉ श्याम कुमार झा ने प्रो. गौड़ का स्वागत फूलों का गुलदस्ता, अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर किया. उन्होंने अपने स्वागत भाषण में कार्यक्रम के उद्देश्य को भी बताया.
अंत में संरक्षक प्रो प्रसून दत्त सिंह ने अपने भाषण में कहा कि संस्कृत साहित्य की परंपरा बहुत विशाल और समृद्ध है. इसमें साहित्य, दर्शन, व्याकरण के अलावा आयुर्वेद, वास्तुकला और शिल्प जैसे क्षेत्रों की जानकारी भी मिलती है.
उन्होंने यह भी कहा कि यह व्याख्यानमाला भारतीय ज्ञान और संस्कृति को बढ़ाने व संरक्षित करने में बड़ी भूमिका निभाएगी. इस पूरे आयोजन को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो संजय श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में पूरा किया गया.
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कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी गोपाल कृष्ण मिश्र ने किया. शुरुआत में शोधार्थी सुखेन घोष ने वैदिक मंगलाचरण प्रस्तुत किया, वहीं अंत में शोधार्थी रंजू यादव ने अपने अनुभव साझा किए. इस व्याख्यानमाला में विश्वविद्यालय के अलग-अलग विभागों के छात्र और शोधार्थी शामिल हुए. यह आयोजन न सिर्फ ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि सभी के लिए प्रेरणादायक भी साबित हुआ.