MGCUB | सोशल मीडिया
MGCU: महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में मीडिया अध्ययन विभाग ने “मीडिया अर्थशास्त्र और नैतिकता” पर एक महत्वपूर्ण एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ.
विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए यह एक दिन भर की उपयोगी और विचारोत्तेजक बातचीत हुई. विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रोफ़ेसर संजय श्रीवास्तव ने संगोष्ठी के संरक्षक के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.
अनुराग दवे रहे मुख्य वक्त
मुख्य वक्ता के तौर पर प्रोफेसर अनुराग दवे (बीएचयू, बनारस), जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग, बीएचयू, बनारस और अध्यक्षता डॉ. अंजनी कुमार झा, विभागाध्यक्ष मीडिया अध्ययन विभाग और संयोजक डॉ परमात्मा कुमार मिश्र उपस्थित रहे.
मुख्य वक्ता प्रोफ़ेसर अनुराग दवे (बीएचयू, बनारस) ने पत्रकारिता की नैतिक जिम्मेदारियों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सत्यनिष्ठा, सटीकता, और निष्पक्षता, मीडिया के मूलभूत स्तंभ हैं.
प्रोफेसर दवे ने कही ये बात
प्रोफ़ेसर दवे ने मीडिया की कार्यप्रणाली, पत्रकारों के नैतिक दायित्व, और मीडिया अर्थशास्त्र के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने जोर देकर कहा कि पत्रकारिता के मूल में सत्य, सटीकता और निष्पक्षता हैं, और विभिन्न धार्मिक, सामाजिक या राजनीतिक समूहों से ऊपर उठकर रिपोर्टिंग करना महत्वपूर्ण है.
उन्होंने बताया कि मीडिया अर्थशास्त्र मीडिया उद्योगों, फ़र्मों और बाज़ारों को प्रभावित करने वाले आर्थिक पहलुओं से जुड़ा है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय व्यापार, बाज़ार रणनीति, मूल्य निर्धारण नीतियां, प्रतिस्पर्धा और औद्योगिक एकाग्रता शामिल हैं.
विद्यार्थियों को मीडिया के वित्तीय विश्लेषण के लिए आंकड़ों और वित्तीय अनुपातों के अध्ययन पर ज़ोर दिया गया. संगोष्ठी में मीडिया के आर्थिक पहलुओं पर भी गहनता से चर्चा हुई.
प्रोफ़ेसर दवे ने बताया कि मीडिया के वित्तीय विश्लेषण में बाज़ार की रणनीतियों, मूल्य निर्धारण, प्रतिस्पर्धा और औद्योगिक संरचना जैसे पहलुओं पर ज़ोर देना ज़रूरी है. अध्यक्षीय संबोधन करते हुए डॉ अंजनी कुमार झा ने कहा कि मीडिया स्वतंत्र और जवाबदेह होना चाहिए, और समाज और राष्ट्र निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है.
मीडिया अर्थशास्त्र और नैतिकता पर हुई चर्चा
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए डॉ. परमात्मा कुमार मिश्र ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मीडिया को नैतिकता का पालन करते हुए सत्य को निडरता से प्रस्तुत करना चाहिए और मीडिया अर्थशास्त्र और नैतिकता के क्षेत्र में आगे शोध और चर्चा की आवश्यकता है. साथ ही उन्होंने मीडिया अर्थशास्त्र और नैतिकता पर चर्चा करने की आवश्यकता को उजागर किया, जिससे प्रदर्शित और जवाबदेही बनी रहें.
संगोष्ठी में इन लोगों की रही मौजूदगी
संगोष्ठी में मीडिया अध्ययन विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. साकेत रमण, डॉ. सुनील दीपक घोड़के, और डॉ. उमा यादव सहित विद्यार्थी एवं शोधार्थी मौजूद रहे. “मीडिया अर्थशास्त्र और नैतिकता” से संबंधित प्रश्न भी किये गए, जिसका मुख्या वक्ता द्वारा संक्षेप में उत्तर दिया गया. कार्यक्रम में रानी कुमारी (बीएजेएमसी तृतीय सेमेस्टर) ने और आदर्श आर्य (एमएजेएमसी प्रथम सेमेस्टर) ने मंच संचालन किया.