महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग ने प्रो सतीश चंद्र झा की याद में सात दिनों तक चलने वाली व्याख्यान माला आयोजित की. इसके पांचवें दिन पाणिनी के सूत्रों और लघुसिद्धांतकौमुदी पर एक खास व्याख्यान हुआ.
इस कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो संजय श्रीवास्तव और संरक्षक मानविकी व भाषा संकाय के डीन प्रो प्रसून दत्त सिंह थे. आयोजन का नेतृत्व संस्कृत विभाग के प्रमुख डॉ श्याम कुमार झा ने किया, जबकि सहायक प्रोफेसर डॉ बबलू पाल और डॉ विश्वजीत बर्मन ने सहयोग किया.
इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर सत्यपाल सिंह थे. उन्होंने बहुत ही आसान और ज्ञानवर्धक तरीके से अपनी बात रखी. कार्यक्रम की शुरुआत प्रो सतीश चंद्र झा की तस्वीर पर फूल चढ़ाकर हुई. डॉ श्याम कुमार झा ने प्रो सत्यपाल सिंह का स्वागत शॉल, स्मृति चिन्ह और फूलों का गुलदस्ता देकर किया.
प्रो प्रसून दत्त सिंह और डॉ श्याम कुमार झा ने वक्ता और श्रोताओं का अभिनंदन किया. डॉ झा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि पाणिनी के सूत्र और लघुसिद्धांतकौमुदी संस्कृत व्याकरण को समझने के लिए बहुत जरूरी हैं.
मुख्य वक्ता प्रो सत्यपाल सिंह ने बताया कि लघुसिद्धांतकौमुदी, सिद्धांतकौमुदी से लिया गया एक छोटा और आसान ग्रंथ है. यह व्याकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है. उन्होंने कहा कि किसी भी शास्त्र को समझने के लिए व्याकरण सबसे जरूरी है. इसमें पाणिनी की अष्टाध्यायी मूल ग्रंथ है और लघुसिद्धांतकौमुदी उसकी प्रक्रिया को समझाने वाला ग्रंथ है.
प्रो सिंह ने माहेश्वर सूत्र से शुरू करके संधि और तिङन्त जैसे विषयों को बहुत आसानी से समझाया। उनकी बातें सुनकर सभी श्रोता प्रभावित हुए. प्रो प्रसून दत्त सिंह ने अपने अध्यक्षीय भाषण में इस आयोजन की तारीफ की और प्रो सत्यपाल सिंह के योगदान को सराहा.
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डॉ श्याम कुमार झा ने कहा कि यह व्याख्यान छात्रों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा और शोध करने वालों के लिए नई राह दिखाएगा. कार्यक्रम का संचालन शोध छात्र सुखेन घोष ने किया और धन्यवाद ज्ञापन गोपाल कृष्ण मिश्र ने दिया. इस मौके पर संस्कृत विभाग के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ दूसरे विभागों के विद्यार्थी भी मौजूद थे. यह आयोजन सभी के लिए ज्ञानवर्धक रहा.