MGCU: मोतिहारी के महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग ने एक खास कार्यक्रम आयोजित किया. यह कार्यक्रम प्रो. सतीश चंद्र झा स्मृति व्याख्यान माला का छठा सत्र था, जिसमें “ध्वनि की अवधारणा: काव्यशास्त्र के परिप्रेक्ष्य में” विषय पर चर्चा हुई.
इस मौके पर मुख्य वक्ता के रूप में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के संस्कृत विभाग के प्रोफेसर शरदिन्दु कुमार त्रिपाठी आए. उन्होंने काव्यशास्त्र को आसान शब्दों में समझाते हुए ध्वनि सिद्धांत पर रोशनी डाली.
प्रो त्रिपाठी ने बताया कि ध्वनि काव्य का सबसे जरूरी हिस्सा है. उन्होंने ध्वन्यालोक नाम की किताब से उदाहरण देकर समझाया कि कविता में शब्दों के पीछे छुपा भाव ही उसे खास बनाता है.
उनकी बातों से यह साफ हुआ कि ध्वन्यालोक के लेखक आनंदवर्धन ने ध्वनि को काव्य की आत्मा कहा था. इसका मतलब है कि कविता में जो कुछ सीधे नहीं कहा जाता, बल्कि इशारों में व्यक्त होता है, वही उसकी असली ताकत है.
प्रो त्रिपाठी ने अपनी बात को इतने सरल और रोचक तरीके से रखा कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया. कार्यक्रम के संरक्षक प्रो प्रसून दत्त सिंह ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया.
उन्होंने प्रो त्रिपाठी को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और फूलों का गुलदस्ता देकर सम्मानित किया. प्रो. सिंह ने कहा कि यह व्याख्यान काव्यशास्त्र जैसे मुश्किल विषय को छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए आसान बनाएगा.
वहीं, संयोजक डॉ श्याम कुमार झा ने सबका धन्यवाद देते हुए बताया कि प्रो त्रिपाठी ने प्रो सतीश चंद्र झा की याद में बनाए गए एक खास किताब के संपादन में भी बड़ी भूमिका निभाई है.
कार्यक्रम को शोधार्थी गोपाल कृष्ण मिश्र ने बहुत अच्छे से चलाया. इस व्याख्यान में संस्कृत विभाग के सभी छात्र और शोधार्थी शामिल हुए. कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम न सिर्फ ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि काव्य और ध्वनि की गहराई को समझने का एक शानदार मौका भी बना.
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प्रो त्रिपाठी की बातें सुनकर लगा कि कविता में शब्दों से ज्यादा उनके पीछे का भाव मायने रखता है, और यही उसे जीवंत बनाता है. यह आयोजन प्रो. सतीश चंद्र झा की स्मृति को सम्मान देने का भी एक सुंदर तरीका था.