MGCU: महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन विभाग में ‘टीवी न्यूज़ का प्रभाव और चुनौतियां’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन बुद्ध परिसर स्थित बृहस्पति सभागार, बनकट में किया गया.
संगोष्ठी के संरक्षक कुलपति प्रो संजय श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. संगोष्ठी के मुख्य वक्ता वरिष्ठ टीवी पत्रकार राजीव रंजन और विशिष्ट वक्ता वरिष्ठ पत्रकार ब्रजमोहन सिंह संपादक थे. स्वागत उद्बोधन विभागाध्यक्ष डॉ अंजनी कुमार झा ने की. कार्यक्रम के संयोजक डॉ परमात्मा कुमार मिश्र, सहायक आचार्य मीडिया अध्ययन विभाग थे.
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो संजय श्रीवास्तव ने कहा कि अकादमिक पत्रकारिता औऱ टीवी पत्रकारिता में मुझे भी कार्य करने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ है. उन्होंने कहा कि भारत में आक्रामक न्यूज डिबेट देखने को मिलती है, जबकि अमेरिका जैसे विकसित देशों में ऐसा नहीं है.
प्रो श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था स्थिर है क्योंकि मीडिया तंत्र बहुत बहुत प्रभावशाली है. अगर हम वर्तमान परिस्थितियों को समझना चाहते है तो भूतकाल के घटनाओं को पढ़िए और किताबों का अध्ययन करिए. इस वक्त सोशल मीडिया सूचना के प्रसार का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन हम देखेंगे कि पांच साल बाद ये दुनिया सोशल मीडिया से भी आगे निकल जाएगी. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व टेक्नोलॉजी और भी ज्यादा शक्तिशाली होकर उभरेगा.
मुख्य वक्ता राजीव रंजन ने अपने बात की शुरुआत शायराना अंदाज में की. उन्होंने कहा कि “कुछ तो मजबूरिया रही होगी ऐसे ही कोई बेवफा नहीं हो जाता”.
उन्होंने कहा की वह आशावादी सोच के शख्स है और पत्रकरिता के फील्ड उस समय आया जिस वक्त पत्रकारिता में किस्मत आजमाने के लिए एक अच्छे घर परिवार शहर से होना एक बड़ा पैमाना था.
उन्होंने पूरे जोश से कहा कि पत्रकारिता का सुनहरा दौर अभी आनी बाकी है. उन्होनें कहा कि बहुत सारे ऐसे पत्रकार हुए जो मुख्य धारा की मीडिया को छोड़कर खुद का चैनल शुरू किया, डिजिटल मार्केटिंग शुरू की और दूसरे लोगों को भी नौकरी दी.
आजकल टीवी चैनल्स में एक ट्रेंड है कि शाम के 6,7,8 बजे से प्राइम टाइम वाली दुकान खुलती है, जिसके बहुत सारे दरवाजे होते है. और वही 30,40 लोग घूम घूम के डिबेट करते रहते है ये दुकानों को चलाना कोई पत्रकारिता नहीं है.
एंकर गूगल से कुछ टॉपिक और पॉइंट्स निकाल कर बहुत सतही डिबेट करने लगते है जो चिंतनीय है। वहां आम जनता के मुद्दों का कोई सरोकार नहीं होता.
उन्होंने कहा कि मीडिया का काम सरकार से सवाल करना है ना कि सरकार का पिछलग्गू बनना. वो जनता की आवाज़ बने विपक्ष की भी बाते सरकार तक पहुंचाए. मीडिया ट्रायल कही न कही नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है और रिया चक्रवर्ती और सुशांत सिंह राजपूत केस का उदाहरण देते हुए अपनी बात की.
विशिष्ट वक्ता ब्रज मोहन सिंह ने कहा कि टेलीविजन संक्रमण काल से गुजर रहा है। मीडिया की मुख्य भूमिका लोगों को शिक्षित करना, सूचित करना और मनोरंजन का है.
मीडिया का एक मुख्य काम लोगो को जागरुक करना और सरकार से सवाल करना है. समय के साथ साथ मीडिया पर ये भी आरोप लगे है कि मीडिया एजेंडा सेटिंग करती है. मीडिया का एक नकारात्मक पहलू और चुनौती ये भी है कि वर्तमान के समय में कुछ मीडिया चैनल चुनाव के वक्त जनता को भटकाने वाले मुद्दे सामने लाते है.
जनता के विचारों और व्यवहार को प्रभावित करने के लिए इन्हें योजना के तौर पर इस्तेमाल करते है। ध्रुवीकरण की राजनीति भी मीडिया के जरिए होती है. जातिगत और धर्म की राजनीति बिहार के लिए एक बड़ी समस्या है.
समाज को ध्रुवीकृत करती मीडिया का मुख्य मुद्दा विकास होना चाहिए. आम जन की समस्या होनी चाहिए. ध्रुवीकरण और प्रभावित करने की राजनीतिक खबरें मीडिया और टेलीविज़न की विश्वसनीयता को खतरे में डालती है.
वर्तमान में बिहार को देखे तो ट्रैफिक मैनेजमेंट एक बड़ी समस्या है, हमें अपनी मीडिया के रूप में जिम्मेदारी को सुनिश्चित करना होगा कि हम अपना काम पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता से करें. वक्त की मांग है कि हमें मीडिया की ताकत और जिम्मेदारी को समझने की जरूरत है.
विभागाध्यक्ष डॉ अंजनी कुमार झा ने कहा कि आज के इस दौर में पत्रकारिता किस दौर से गुजर रही, कभी विज्ञापन का दबाव, कभी सरकार का दबाव, इसके बावजूद भी कुछ ईमानदार पत्रकारों की वजह से पत्रकरिता बची हुई है. उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें पढ़ने और समाज, देश काल परिस्थितियों को समझने पर जोर दिया.
संगोष्ठी में डॉ परमात्मा कुमार मिश्र और शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा लिखित पुस्तक ‘ जनमाध्यम के विविध आयाम’ पुस्तक का हुआ विमोचन
संगोष्ठी में स्वागत उद्बोधन के बाद डॉ परमात्मा कुमार मिश्र और शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय द्वारा लिखित पुस्तक ‘ जनमाध्यम के विविध आयाम’ पुस्तक का विमोचन हुआ। पुस्तक के बारें में डॉ परमात्मा कुमार मिश्र ने चर्चा करते हुए कहा कि ‘पत्रकारिता के विविध आयाम’ पुस्तक में प्रिंट मीडिया, रेडियों, टीवी के साथ न्यू मीडिया की संक्षिप्त इतिहास और विशेषताओं का सूक्ष्मता के साथ जिक्र है। पुस्तक का प्रकाशन लिटररी सर्किल, राजस्थान ने की है.
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कार्यक्रम संयोजक डॉ परमात्मा कुमार मिश्र ने कहा कि मीडिया को अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा. मीडिया अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता. क्योंकि मीडिया समाज और देश के लिए प्रथम है.
संगोष्ठी में विभाग के शिक्षक डॉ साकेत रमण, डॉ सुनील दीपक घोड़के, डॉ उमा यादव, डॉ आयुष आनंद और डॉ. मयंक भारद्वाज की सक्रिय भूमिका थी. कार्यक्रम का संचालन बीएजेएमसी चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थी नीतीश कुमार ने की.
अतिथियों का परिचय प्रेरणा सिंह, पुरुषोत्तम मिश्र और अर्पिता कुमारी ने की. मंगलाचरण शोधार्थी कृष्ण गोपाल मिश्र ने प्रस्तुत की. संगोष्ठी में प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन हुआ जिसमें मंचासीन अतिथियों ने विद्यार्थियों तुशाल, प्रतीक, श्रेया और पुरुषोत्तम आदि के सवालों का उत्तर दिया.