Champaran: मोतिहारी के राजेंद्र नगर भवन में रोशनाई फाउंडेशन और अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के संयुक्त तत्वावधान में ‘सृजनोत्सव’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ. इस आयोजन में साहित्य और भाषा प्रेमियों का अद्भुत संगम देखने को मिला.
कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न हुआ. प्रथम सत्र में चंपारण के वरिष्ठ कवि योगेन्द्र नाथ शर्मा की चर्चित काव्य कृति ‘धूप के धब्बे’ का भव्य लोकार्पण किया गया. समारोह की अध्यक्षता मुजफ्फरपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो रवींद्र कुमार ‘रवि’ ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ ब्रजभूषण मिश्र उपस्थित रहे.
इस अवसर पर डॉ परमात्मा कुमार मिश्र ने कहा कि योगेन्द्र नाथ शर्मा जी की सक्रियता युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत है. वहीं, डॉ हरीन्द्र हिमकर ने साहित्य को राष्ट्र की प्राणवायु बताते हुए शर्मा जी को राष्ट्रीय स्तर का कवि बताया. कवयित्री डॉ मधुबाला सिन्हा ने आयोजन को सुखद ऊर्जा से भरपूर बताया.
मुख्य वक्ता डॉ मिश्र ने शर्मा जी को छायावादोत्तर युग का महत्वपूर्ण कवि करार देते हुए उनकी कविताओं में विविध प्रवृत्तियों की पहचान की. प्रो रवीन्द्र कुमार ‘रवि’ ने योगेन्द्र नाथ शर्मा के साथ साझा मंच के अनुभवों को साझा करते हुए पुस्तक विमोचन के इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनने को गौरवपूर्ण बताया.
प्रो मंजरी वर्मा ने कहा कि शर्मा जी की रचनाओं में निजता और जनधर्मिता दोनों का अद्भुत समन्वय है. प्रो संत साह ने उन्हें चंपारण का युगपुरुष घोषित किया.
कार्यक्रम में कवि योगेन्द्र नाथ शर्मा को सुषमा फिल्म के डीके आजाद और भोजपुरी प्रतिष्ठान, नेपाल द्वारा सम्मानित किया गया. इसके साथ ही ‘क्षितिज’ संस्था द्वारा ‘राजीव-सरयू साहित्य सम्मान-2025’ प्रदान किया गया, जिसमें 5101 रुपए और अंगवस्त्र प्रदान किए गए.
प्रथम सत्र का सुंदर मंच संचालन प्रो अरुण कुमार ने किया. दूसरे सत्र में ‘भोजपुरी के संवैधानिक मान्यता, संघर्ष और समाधान’ विषय पर विचार-विमर्श हुआ. डॉ ब्रजभूषण मिश्र ने भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता हेतु संघर्ष और समाधान के आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला.
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इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. हरीन्द्र हिमकर ने और संचालन कवि गुलरेज शहजाद ने किया. कवि सम्मेलन में नेपाल से आमोद गुप्ता, विजय गुप्ता और स्मिता पटेल, बेतिया से अरुण गोपाल, ज्ञानेश्वर गुंजन, जय किशोर ‘जय’, तथा मोतिहारी से मिथिलेश घायल, धनुषधारी कुशवाहा, डॉ मधुबाला सिन्हा सहित कई कवियों ने अपने उत्कृष्ट काव्यपाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.
इस सत्र में गंधर्व सिंह तोमर की पुस्तक ‘लेखनी तो साथ है’ के भोजपुरी अनुवाद ‘लेखनी त जवरे बा’ का विमोचन भी डॉ मधुबाला सिन्हा द्वारा किया गया. कार्यक्रम की सफलता में डॉ अनिल वर्मा, गुलरेज शहजाद, सुदीप कुमार, डॉ विनय कुमार सिंह और डॉ मधुबाला सिन्हा की उल्लेखनीय भूमिका रही. समापन तक सभागार श्रोताओं की उत्साही उपस्थिति से भरा रहा, जो इस आयोजन की सफलता का प्रतीक था.