Ishan Kishan (Photo: Instragram/@ishankishan23)
Ishan Kishan Comeback Story: क्रिकेट की दुनिया में एक खिलाड़ी के लिए टीम इंडिया से बाहर होना और सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट गंवाना किसी बड़े झटके से कम नहीं होता. जब प्रदर्शन पर सवाल उठने लगें और आलोचनाएं चारों तरफ से घेर लें, तब खुद पर भरोसा बनाए रखना आसान नहीं होता. भारतीय क्रिकेटर ईशान किशन ने भी अपने करियर में ऐसा ही मुश्किल दौर देखा. लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार मानने के बजाय मेहनत और धैर्य का रास्ता चुना. आज वही ईशान दुनिया के नंबर-1 T20 बल्लेबाज बनकर अपनी नई पहचान बना चुके हैं.
मुश्किल दौर में भी ईशान किशन ने नहीं छोड़ा हौसला
ईशान किशन के लिए टीम इंडिया से बाहर होना और सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट गंवाना किसी बड़े झटके से कम नहीं था. इस दौरान उनके खेल और फैसलों को लेकर कई सवाल उठे. लेकिन उन्होंने आलोचनाओं को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. भारतीय टीम में वापसी के इरादे से ईशान ने घरेलू क्रिकेट का रुख किया और लगातार अपने खेल को बेहतर बनाने में जुटे रहे.
उनकी मेहनत का असर सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में देखने को मिला. इस टूर्नामेंट में ईशान का बल्ला जमकर बोला। उन्होंने न सिर्फ शानदार बल्लेबाजी की, बल्कि अपनी कप्तानी से झारखंड की टीम को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उनकी अगुवाई में झारखंड ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया. यह जीत ईशान के करियर का अहम मोड़ साबित हुई और भारतीय टीम में उनकी वापसी का मजबूत आधार बनी.
टीम इंडिया में वापसी के बाद रचा नया इतिहास
घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद ईशान किशन का चयन न्यूजीलैंड श्रृंखला और T20 विश्व कप के लिए हुआ. टीम इंडिया में वापसी के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और बेखौफ अंदाज के दम पर उन्होंने एक बार फिर क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान खींचा।
इसके बाद जुलाई 2026 में ईशान किशन ने ICC T20 रैंकिंग में दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज बनने का मुकाम हासिल किया. इतना ही नहीं, अब उन्होंने भारत की ओर से एक कैलेंडर वर्ष में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज कर लिया है. सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट गंवाने और टीम से बाहर होने के बाद इस मुकाम तक पहुंचना उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि है.
मानसिक शांति के लिए भगवद्गीता का लिया सहारा
ईशान किशन के इस सफर की एक खास बात उनका मानसिक संघर्ष भी है. उन्होंने बताया कि जब टीम इंडिया के दरवाजे उनके लिए बंद थे और हर तरफ आलोचनाएं हो रही थीं, तब मानसिक शांति और प्रेरणा के लिए उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का सहारा लिया.
ईशान का पिछला एक साल इस बात की मिसाल है कि मुश्किल परिस्थितियां किसी खिलाड़ी की कहानी का अंत नहीं होतीं. लगातार मेहनत, खुद पर विश्वास और कभी हार न मानने का जज्बा इंसान को दोबारा शिखर तक पहुंचा सकता है. सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर होने से लेकर दुनिया का नंबर-1 T20 बल्लेबाज बनने तक का उनका सफर इसी जिद और जुनून की कहानी बयां करता है.
(Written by Pushkar Pandey, Student, DOMS, MGCUB)