Children exploring digital Learning Centre in Delhi. Photo: Newsmorrow
SOS Children’s Villages India: दिल्ली के एक ऐसे इलाके में, जहां आज भी बड़ी संख्या में बच्चों और युवाओं के लिए डिजिटल सुविधाएं दूर की बात हैं, अब कंप्यूटर और डिजिटल शिक्षा खुद उनके दरवाजे तक पहुंच रही है। SOS Children’s Villages India ने Informa Exhibitions India Pvt Ltd., जो Informa Markets in India का हिस्सा है और देश की प्रमुख B2B इवेंट आयोजक कंपनियों में शामिल है, के साथ मिलकर दिल्ली में अपना दूसरा मोबाइल डिजिटल लर्निंग सेंटर (MDLC) शुरू किया है.
उत्तर-पश्चिम दिल्ली के एक संवेदनशील और जरूरतमंद इलाके में इस पहल की शुरुआत के दौरान बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला. बच्चे नीले रंग की उस बस में पहुंचे, जिसमें डेस्कटॉप कंप्यूटर और प्रोजेक्टर स्क्रीन लगाए गए हैं. इस बस का उद्देश्य उन इलाकों तक डिजिटल शिक्षा पहुंचाना है, जहां बच्चों और युवाओं के पास कंप्यूटर, स्मार्टफोन या इंटरनेट जैसी बुनियादी डिजिटल सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं.
दिल्ली में 800 से ज्यादा नए लाभार्थियों का लक्ष्य
SOS Children’s Villages India का मोबाइल डिजिटल लर्निंग कार्यक्रम फिलहाल दिल्ली, पुणे और रायपुर में चल रहा है। इससे अब तक 804 लोगों को सीधे लाभ मिला है, जिनमें 152 बच्चे शामिल हैं. दिल्ली में शुरू किए गए दूसरे मोबाइल डिजिटल लर्निंग सेंटर के जरिए अगले एक साल में 800 से अधिक नए लाभार्थियों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है.
इस पहल का मकसद समाज के कमजोर और वंचित वर्गों से आने वाले बच्चों, युवाओं और महिलाओं को मुफ्त डिजिटल कौशल, रोजगार के लिए जरूरी प्रशिक्षण और डिजिटल दुनिया में आत्मविश्वास देना है.
SOS Children’s Villages India के CEO सुमंता कर ने कहा कि आज के समय में शिक्षा, रोजगार और सामाजिक तरक्की के लिए डिजिटल तकनीक तक पहुंच जरूरी हो गई है. लेकिन वंचित इलाकों में रहने वाले कई बच्चों और युवाओं के लिए तकनीक और डिजिटल शिक्षा अभी भी आसानी से उपलब्ध नहीं है. ऐसे में मोबाइल डिजिटल लर्निंग सेंटर तकनीक को सीधे उनके मोहल्लों तक ले जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि जब शिक्षा बच्चे के अपने इलाके तक पहुंचती है तो दूरी, खर्च और दूसरी परेशानियां उसके रास्ते में बाधा नहीं बनतीं. हर बच्चे को डिजिटल दुनिया में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए.
उत्तर-पश्चिम दिल्ली में डिजिटल पहुंच की बड़ी चुनौती
उत्तर-पश्चिम और उत्तर दिल्ली में बड़ी संख्या में सड़क पर रहने वाले बच्चे रहते हैं. राजधानी में ऐसे बच्चों की संख्या करीब 60,000 बताई गई है. यही वजह है कि दूसरे मोबाइल डिजिटल लर्निंग सेंटर के लिए उत्तर-पश्चिम दिल्ली को चुना गया है.
इस क्षेत्र में करीब 3 लाख झुग्गी परिवार 675 क्लस्टरों में रहते हैं. यहां सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 45 प्रतिशत विद्यार्थियों के पास स्मार्टफोन या स्थिर इंटरनेट कनेक्शन नहीं है. वहीं, दिल्ली के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के 77 प्रतिशत युवाओं को पहले डिजिटल साक्षरता का कोई अनुभव नहीं था.
डिजिटल साक्षरता से लेकर साइबर सुरक्षा तक प्रशिक्षण
मोबाइल डिजिटल लर्निंग सेंटर में लाभार्थियों को पांच प्रमुख क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है. इनमें डिजिटल साक्षरता, साइबर सुरक्षा, वित्तीय साक्षरता, जीवन कौशल और प्रमाणित आकलन शामिल हैं. सेंटर के पहले साल के अनुभव भी उत्साह बढ़ाने वाले रहे हैं. इसके पांच लाभार्थियों को नौकरी मिली, जबकि आठ बच्चों का दोबारा स्कूल में दाखिला कराया गया. इसके अलावा छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं से जुड़े 28 लिंक तथा उच्च शिक्षा से जुड़े 32 लिंक भी उपलब्ध कराए गए.
Informa Markets in India के मैनेजिंग डायरेक्टर योगेश मुद्रास ने कहा कि उनकी CSR पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सीखने, आगे बढ़ने और सफल होने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि SOS Children’s Villages India के साथ साझेदारी डिजिटल शिक्षा और भविष्य के लिए जरूरी कौशल को जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाने में मदद कर रही है.
सात राज्यों और आठ शहरों तक फैला नेटवर्क
मोबाइल डिजिटल लर्निंग सेंटर, SOS Children’s Villages India के बड़े डिजिटल परिवर्तन और कौशल विकास नेटवर्क का हिस्सा है। यह नेटवर्क देश के सात राज्यों और आठ शहरों में काम कर रहा है. संस्था तीन तरह के कार्यक्रमों के जरिए डिजिटल और व्यावसायिक प्रशिक्षण देती है. पहला, मोबाइल डिजिटल लर्निंग सेंटर, जिसमें विशेष रूप से तैयार बसें शहरी झुग्गियों और दूरदराज के इलाकों तक जाती हैं. दूसरा, वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर (VTC), जहां 18 से 27 वर्ष की उम्र के युवाओं को गहन व्यावसायिक और डिजिटल कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है. तीसरा, आफ्टर-स्कूल VTC, जो 14 से 17 वर्ष के विद्यार्थियों के लिए स्कूल आधारित डिजिटल लर्निंग सेंटर हैं.
इन कार्यक्रमों के जरिए हर साल करीब 2,610 युवा जुड़ते हैं. उन्हें पढ़ाई में आगे बढ़ने, खुद सीखने, डिजिटल रोजगार कौशल, सरकारी सेवाओं और योजनाओं तक पहुंच, वित्तीय समावेशन, साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन सीखने की आदतों के लिए तैयार किया जाता है. संस्था का लक्ष्य डिजिटल अशिक्षा को कम करते हुए भारत में डिजिटल रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर समाज की दिशा में आगे बढ़ना है.
1964 से बच्चों के लिए काम कर रही संस्था
SOS Children’s Villages India की स्थापना 1964 में हुई थी. संस्था ऐसे बच्चों के लिए काम करती है जिनके पास माता-पिता की देखभाल नहीं है या जिन्हें ऐसी देखभाल खोने का खतरा है. संस्था केवल बच्चों की देखभाल तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनके समग्र विकास पर ध्यान देती है. इसके कार्यक्रमों में Family Like Care, Family Strengthening, Kinship Care, Short Stay Homes, Foster Care, Youth Skilling, Emergency Childcare और Special Needs Childcare शामिल हैं. संस्था कमजोर परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में भी मदद करती है, ताकि वे बच्चों के लिए सुरक्षित और बेहतर माहौल तैयार कर सकें.
आज 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 32 SOS Children’s Villages के 440 से अधिक परिवारों में 5,000 से ज्यादा बच्चे रहते हैं. संस्था के अनुसार, इन बच्चों की देखभाल SOS Mothers और Aunts करती हैं. संस्था हर साल 45,000 से अधिक बच्चों को सशक्त बनाने और 70,000 से ज्यादा लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालने का काम कर रही है.
Informa Markets की वैश्विक पहुंच
Informa Markets उद्योगों और विशेषज्ञ बाजारों के लिए ऐसे प्लेटफॉर्म तैयार करता है, जहां कंपनियां व्यापार, नवाचार और विकास के अवसर तलाश सकें. इसके पोर्टफोलियो में स्वास्थ्य एवं फार्मास्यूटिकल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्माण एवं रियल एस्टेट, फैशन एवं परिधान, हॉस्पिटैलिटी, खाद्य एवं पेय तथा हेल्थ एवं न्यूट्रिशन सहित कई क्षेत्रों के 550 से अधिक अंतरराष्ट्रीय B2B कार्यक्रम और ब्रांड शामिल हैं. कंपनी दुनिया भर के ग्राहकों और साझेदारों को आमने-सामने होने वाली प्रदर्शनियों, डिजिटल कंटेंट और डेटा आधारित समाधानों के जरिए जुड़ने और कारोबार बढ़ाने के अवसर देती है.
Opinion: “नवीन मानवीयता की ओर: शिक्षा, सेवा और सुशासन से संवरती पुलिस व्यवस्था”